चरणाबन्दे जी... बड्डे सालों बाद किसी मरद के बच्चे ने दूर पहाड़ों में
बैठे आपके इस दादू के बारे में सूंचा.... मेरे पुत्तर... नूं... धोत्रू
.. पोत्रू , घरैत-सरीक.. सारे लोक मुझे बीडी का सुट्टा नीं लगाणे नीं
देते थिए... इस अरुण जेटली, नाम के अक्लमंद आदमी ने मेरे मन की बात कैसे
पकड ली मैं तो हरान रे गेया... ऐसा अन्तर्यामी कई मुरादों मिन्नतों के बाद
मिलता है जी... कई सालों बाद आपके इस सयाणे दादू को बजट देखणे की चड़ी कने
सारे ते जाददा फैदा बी होया मेरे को ई | पूछो कैसे... वो ऐसे कि भई कि
बीड़ी जैसी आम जरूरत की चीज़ के दाम एक अठन्नी भी नी बधाए... इससे ए
साबत हो गया कि बीडी जैसी चीज आम आदमी के लिए कितणे माइने रखती है जी..
इसका मतबल ए होया कि बीडी ही एकमात्र ऐसा साधन है जिसके शोटणे आनिकि
ग्रेजी में बोले तो पीणे से फेफड़े को ताकत मिलती है जी | बो सारे लोग
मूर्ख किसम के लोक हैं जो बीड़ी को सेहत के लिए हानिकारक होणे का
झूठा-मूठा परचार करते हैं जी... ऐसा होता तो म्हारे बजट मनिस्टर साब इतणी
सारी चीजों के दाम बधा सकते हैं तो बीड़ी के दाम बी जरूर बधाते...? इतणे बी
पागल थोड़े न हैं...? बाचारी बीड़ी को सस्ते में क्यों छोड़ते.. कने म्हारा
बजट मनिस्टर कोई ऐरा गिरा नत्थू खैरा आदमी भी नी हो सकता..... उसकी बात तो
पाथर की लकीर की तरे मानूंगा जी.. मैंने तो अपणे बच्चों को बोल दिया....
है ... जे अब मेरे को बीडी पीणे से रोका तो सीददी शकैत बजट मनिस्टर साब के
पास ठोकूंगा लगाके.. गऊ कसम... म्हारे बजट मनिस्टर साब का गुड मैन दी
लालटेन दामाग देखो आप... कि बीडी जैसे लुप्त हो रई......हमारी धरोहर बीडी
के शुट्टे को शहीद होणे से बचा लिया... बीड़ी के खलाफ पिचली सरकार की
साजिशों को बी बजट मनिश्टर साब ने मूं की दखा दी... अब मैं और मेरे जैसे
गाँव के जागरूक बीड़ीमार बड्डी छाती करके कह सकते हैं कि अच्छे दिन आणे बाले
नी है बला... आ गए हैं.. हर तरफ बीडी जलाई ले जिगर से पीया.. गाणा चलेगा
अब तो.. आपके इस दादू को किसके बाप की मजाल, जे बीडी पीणे से रोक ले.. अब
तो लाम्बी-लंबी.... ब्लेंडर पराइड सग्रिट पीणे आले बीअपणे स्टेटस का ख्याल
करते होए घुसलखाने आनिकि बाथरूम में बीडी का शूट्टा चोरी छुपे से लगाएंगे
जी..क्योंकि सारे के सामणे तो उनके स्टेटस की बेइज्जती खराब होएगी जी | कने
इतणी मैंगी सग्रीट पीएगा बी कौण ? किसानो की आमदनी पांच सालों में दुगणी
होणे की बात तो बजट मनिश्टर साब ने बड्डी चालाकी से बोली है जी.... मेरे को
ए ख्याल फिर रेया है जे .. बजट मनिश्टर साब को ए पता लग गेया है कि अगली
पांच साल से पैल्ल्ले तो लैक्षण बी आ जाणा | सरकार तो आणे से रई दबारा..
फिर अइसे में किसानों की कमाई दुगणी करणे का शोशा छोड़ने में क्या फरक पड़ता
है... अगली सरकार से जब कसान दुगणी फसल की बात बताएंगे तो बजट मनिश्टर को
किसने पूछणा... अगर पूछ बी लिया तो कै देंगे कि भाई फसल दुगणी तो तब होणी
थी जब सरकार बी म्हारी होती.. अब सरकार म्हारी नहीं तो हम फसल बी दुगणी
कहाँ से करे.. फिर बी मरणे माराणे की नौबत आ गयी तो किसानों का एक लाख
रपइये का.. कि पता नीं दो लाख रपए का बीमा तो है ई किया होया.. भले ही
नकसाण 5 लाख का हो, जब किसान जैर खा ले तो दो लाख तो मिल ही जाणे | कपडे की
जगह पुराणी घास पत्ती के पोशाक फिर से मशहूर होएँगे.. तो आपका क्या
घिसेगा जी.... उलटे दो पइसे बचेंगे होर... मलाज्मों को 3 हजार टैक्स में
छूट देणे से मतबल होणा चाहिए... पीचे से जो 10 हजार की पतानी कितणे हजार के
टैक्स उनके चूतडों में ठोके हैं.. उससे उनका क्या लेणा-देणा. अपणे काम से
काम रखणा चाइये... हैं न जी... कपडे का क्या है पराणे कपडे को टल्ली लगा कर
फैसन करो... खरीदणे की तो औकात नीं रएगी अब आपकी.. बजट मनिश्टर साब ने
कुर्तु सुथणु इतणे मइंगे कर देणे कि आपको नए खरीदणे की सूंच भी न आए | इससे
आपका कितणा पोइंसा बच जाएगा जी..... इसते बदिया बजट बी कदी मिल सकता थिया
आपको.... जादा नीं मछरैणा मतबल चिढाणा बजट मंत्री साब को कइं गुस्सा आ गया
तो.. मंत्रियों संतरियों की तन्खा कर देंगे दुगणी.. फिर आपको क्या
मिलेगा... ठोसा......................... गलाया बोल्या माफ़....
मंदबुद्दी खशटोर लाखारियों को भी मिले आरक्षण
फेसबुक में अपणा परचार करने बाले खशटोर किसम के लाखारियों को भी आरक्षण
मिलणा चाहिए.. (सुरुआत हमाचल से होणी चाहिए, क्योंकि इनकी उत्पत्ति सारे
ते पैल्ले हमाचल में ही होई है... इस बात के आपके रगडा दाद्दू के पास
पुख्ता सबूत है ) ऐसे लखारी..... दूसरों को कबी बी नईं पढ़ सकते... ऐसे
लखारी... मानसिक रूप से बहुत कमजोर किस्म के पिछड़े हुए लोक होते हैं...
मंद बुद्दी इन लाखारियों को अपनी कहाणी को एक जैसे ही सब्जेक्ट के नेड़े
तेडे घमाणे की आदत होती है..... ऐसे लखारी अपणी रचनाओं को कई जुगाड़ों से
पर्चारित कने परसारित करने का खुराफाती दमाग रखते हैं... जिसके कारण इनका
मानसिक दायरा खू का खू ( खू मतबल कूआं ) में ही रहता है...... ऐसे मानसिक
रूप से कमजोर लोकों को.. बी आरक्षण देकर सीद्दे भारत रत्न तक पहुंचा देणा
चाईये... है की नीं..
सिम्ले में पीले रंग का भूत
म्हाचल की राजधानी सिमले की हाखी आज कल पिउंली अनिकि पीली हो गयी है जी | इसका कारन आप लोक जो दूर बैठे हैं कने जो ग्रावों में बैठे हैं, कैसे समज सकते हैं जी | द्रसल जब साफ़ पाणी पलाणे आला मैक्मा ही टट्टी-पसाब मिला पाणी पला दे तो फिर आपको पीलिया नी होएगा तो भला क्या होएगा | आपको बता दूं कि सिम्ले में पाणी की किल्लत कोइ नोईं बात थोड़े ही है जी| ग्रेजों ने अपणे मजे रजे के लिए बसाया सिमला शैर इतना घणा हो गया है कि न तो अभ अब हरे हरे घास बाले वो धारठू नदर आते कने न ही देवदार के जंगल | 50 हज़ार लोकों के लिए बना ए शैर २०११ के आंकड़े के मताबिक 169,578/- की जनसंख्या में है जी , मतबल की दुगप्णे से बी जाता, न रैणे को जागा, न गाडी खरेडने को जागा | 2011 के बाद अब तो जी चार साल लगे होणे, तो लोकों ने होर नकाली होणि प्रोग्रेस कने ए आंकड़ा पौंच गया होगा जी कोइ ढाई लाख से बी जादा | म्हारी सरकार ने राजधानी बी आदी-आदी कर दी आदी सिम्ले में कने आदी धरमशाला में, परन्तु बस इ रैई ठगणे की ही राजधानी | काम तो जी सिम्ले में ही हो रए हैं जी | बस लीडरों का घूमणा फिरणा हो जाता है इसी बहाने बाकी तो सब आई वाश है जी | खैर स्लेबस की तरफ आता हूँ जी | सिम्ले की पीऊली हॉखी देख कर आप बी हरान परेशान रएंगे जी.. कि यहीं पर टट्टी- पसाब आला पाणी पीकर साफ पाणी के प्रोजेक्ट बण ते हैं जी |अब आप बोलेंगे जी सिम्ले में टट्टी पसाब आला पाणी...??? कुछ गल्ल हजम नी होई जी... तो जी बात ऐसी है कि म्हारा पाणी मैक्मा तो बचारा मजे की निंदर था सोया होया... इ तो भला होए इस पीलिये का जे सिम्ले की हाखी में चढ़ गया.. जब एक बार किसी ने सिम्ले को बोला जे भाई म्हारे पहाड़ा रे दिल सिमला.. तेरी तो हाखी प्यूंली-प्यूंली लग रई है मेरे को.. तो जब सीसे में देखा तब जाके पता चला के मेरे को तो परमैओं आनिकि पीलिया हो गया है जी.. फिर क्या था सिम्ले का छोटा भाई बाकास नगर, संजोली, ढली, टूटू, खालीनी, चक्कर होर तो होर.. वीआईपी सकट्रेट बी पिऊंले हो लिए.. इस पीलिये ने तो म्हारी बऊ बेटियों को बी नी छोडा.. देखो म्हारे मेयर साब की लाड़ी कने म्हारी प्यारी बऊ फाल्मा को बी होके रेया मुआ... एक तो म्हारे बड्डे आई इ एस अफसर साब बी होली पीले... आई ए एस अफसर तो माराज़ अपणे अगल बगल टाईट स्कोरटी बी रखते हैं.. लम्बी..लम्बी मूंछ आला बंदूकची रहता है साथ साथ.. ताकि साब जी को कोई ख़तरा न हो सके... लेकिन माराज़ पीलिया निकला सबका बाप आई ए एस अफसर को बी हो लिया.. होया इतणा कि सिम्ले के डाक्टर नी कर सके कट्रौल कने आई ए एस अफसर साब को पी जी आई जाणा पड़ गेया लाज कराणे | दरअसल शुणने में आया ए कि पीलिया ऐसे नी कर सकता था आई इ एस साब का कुछ.. एक दिन अपणे एक मित्तर के गलाणे पर दो पैग सट दिए कने बिगड़ी गल्ल.. दो पैग तक तो मिला सोडा कने बिसलरी का पाणी कने तीसरे पैग में तो फिर किसको पता कि अस्वनी खड्ड का टट्टी-पसाब आला पाणी ही ठोक दिया मला के.. तो फिर पीलिया थोड़ी प्छाणता है आई ए एस कने चपडासी.. बस अब आई ए एस साब का लाज है चलेया होया.. पीलिया तो ठीक हो रेया है पर बचारे के बेफजूल में 'नागे' जा रहे हैं पी जी आई में.. हा हा हा...डाक्टर जो दवाई के बीच में ही रैते हैं मुए.. उनको बी कहाँ छूट मिली.... लोकों को तो डाक्टर साब बोलते रए कि झाड़-फूंक नी करआणि, परन्तु अपणी जान बचाणे के डर से मूं छपाकर झाड़ फूंक कराणे जा रए हैं रोज.... लेकिन पीलिया उतरणे का नाम कैसे लेगा जी... टट्टी पसाब आला पाणी अपणा रंग तो दखा के ही जाएगा.. कई बचारे बेकसूर मारे बी गए...
अब आप हँसेगे तो बेसक हंसो आपको कहाणी शणाता हूँ.. कि ए टट्टी पासब आया कहाँ से.. न न आप बोलो खुद ही जब एक साथ एक लाख सत्तर हज़ार लोक रोज छोटे जैसे सिम्ले में टट्टी-पसाब करेंगे... तो हमारे पाणी बभाग के दो कर्मचारी सीवरेज प्लांट में उस टट्टी पसाब का हसाब कताब कैसे रखेंगे.. उनोने सोचा जे ए टट्टी पसाब तो खाद का काम करता है..... तो दे तेरे की सीद्दा उसी खड्ड में दो जाणे जिससे म्हारे देसा रा दिल सिमला को पाणी जाता है.. बाकी काक्जों में तो ए बचारे पाणी बभाग के कर्मचारी पूरी कारवाई लगे होए थे करणे.. कि ओ रोज चैक करते हों जैसे.. उनका जाणे अगला महीना कि सीवरेज का पाणी किद्दर जा रेया है.. ए तो मुआ पीलिया आया नेईं तो ए तो पुलिस के घड़सोले में बी कहाँ आणे थिए... खैर अब फिलहाल पीलिया रोकणे के लिए अश्वनी खड्ड में मिलने बाला सीवरेज का पाणी जहाँ रोक दिया गया है वहीं.. लोकों का टट्टी पसाब तो जारी है.. लेकन बड्डे बड़ी पाणी बभाग के अफसरों का टट्टी-पसाब बंद हो गया है जी.. पुलस बाले अब कबी बी उनके चूतड़ कूट के न केवल उनकी लापरवाई के लिए उनको सजा देणे की फराक में हैं बल्कि उनकी नौकरी बी खतरे में पड़ गयी है..... पीलिया सिम्ले से सोलन की तरफ हो लिया है.. पता नहीं कब तक अपणा तांडव दखाएगा.. परन्तु आपसे एक अरदास है.. टट्टी पासाब खुले में न जाएं.. पाणी को खूब उबाल के पीएं.. अक्वागारड लगा सकें तो लगा लें.. ओ बी यू वी वाला.. नईं तो पीलिया महाराज तो आपके प्राण हरणे को खड़ा है....... कने किसी को बड़ा स्यापा पड़ा है..
जे देवा..
कताबों का बड्डा भारी मेला
जै देवा जी...
माफ़ करणा जी पिछले कई दिनों से तरे तरे की बामारियों से था घिरेया होया | फिर आजकल पीलिया बी हो लिया जी | इस पता नी आपके इस दादू के मरणा कब होएगा | खैर... पिचले दिनो मेरी एक प्यारी दोस्त सरोज बशिष्ठ का दाणा पाणी बी मुक गेया कने बचारी म्हारे को छोड़ के चली गयी... तिसते परान्त म्हारे सारे ते प्यारे कने बजुर्ग संत्येन शर्मा जी ने भी म्हारा साथ छोड़ दिया | भगबाण इन लाखारियों को सुरग में सुख शांती दे जी..
आज कल मैं देख रेया था कि दिल्ली में कताबों का बड्डा भारी मेला थिया जी लगेया होया... मेरे को किसी ने इ बी शणाया जे कई म्हारे लखारी बी इस जातर में पौंचे होए थे..... लेकण मेरा सारे ते प्यारा राज कमार रकेश तो मेले से आणे को बी नीं था तयार.... हो बी क्यों जी... असल में खून पसीने कने मीणत से लिख रेया है जी..... ओम परकास सारस्वत, सदर्शण बशिष्ट तुलसी रमण, बदरी सिंग भाटिया हुक्मिया सिंह ठाकर, बिक्रम मसाफिर परकास बादल कने होर भी बथेरे थे पौंचे होए... ए बी शुणा जे पूरे देस की अकादमियों की कताबों की दकाने थी लगी होई जी मेले में.... तो मैंने पूछ लिया जी किसी से.. की फिर तो म्हारी अकादमी कने बभाग की दकान भी होएगी लगी होई.. तो सारे ने मेरे को ए बताया कि म्हारी अकादमी बाले कने बभाग बाले का कोइ स्टाल नी थिया लगेया होया... फिर कारण पता किया आपके इस दादू ने.. तो ए बताया गेया कि अकादमी ने जब इतने सालों से कुछ किया ही नईं तो दूकान कैसे लगाएगी.... ए बात कुछ हजम नी होई जी.. मैंने बोला जे कादमी बाले तो कुछ न कुछ लगे होते हैं करणे जी... फिर किसी ने मेरे को बताया जे काम तो कादमी खूब कर रई है जी लेकण माननीय मुख्मंत्री जी को बरगलाणे कने उनकी चमचागिरी मारणे के अलाबा दुसरे काम से फुर्सत नीं जी.. लेकण मैं ऐसा नी मानता.. आज कल पीलिया भी शुणा है फैला होया.. कईं पैग सटती बारी कईं लाप्रबाई हो गयी होगी कने पीलिये ने जकड़ लिया होएगा कादमी के कार कारिंदों को.. कियोंकि पैग में तो उबला होया पाणी नी न डाल सकते हैं न जी !....
सच्ची बात होएगी ए जी..... की साले खाशटोरे फजूल में म्हारी कादमी कने बभाग के हारड बरकरों को खामखा में लगे होएँगे बदनाम करणे.... पता कराणा जरा आपने.. कने लग जाए पता तो मेरे को बी बताणा.... देखणा बे आपको लगे कसमी.....
माफ़ करणा जी पिछले कई दिनों से तरे तरे की बामारियों से था घिरेया होया | फिर आजकल पीलिया बी हो लिया जी | इस पता नी आपके इस दादू के मरणा कब होएगा | खैर... पिचले दिनो मेरी एक प्यारी दोस्त सरोज बशिष्ठ का दाणा पाणी बी मुक गेया कने बचारी म्हारे को छोड़ के चली गयी... तिसते परान्त म्हारे सारे ते प्यारे कने बजुर्ग संत्येन शर्मा जी ने भी म्हारा साथ छोड़ दिया | भगबाण इन लाखारियों को सुरग में सुख शांती दे जी..
आज कल मैं देख रेया था कि दिल्ली में कताबों का बड्डा भारी मेला थिया जी लगेया होया... मेरे को किसी ने इ बी शणाया जे कई म्हारे लखारी बी इस जातर में पौंचे होए थे..... लेकण मेरा सारे ते प्यारा राज कमार रकेश तो मेले से आणे को बी नीं था तयार.... हो बी क्यों जी... असल में खून पसीने कने मीणत से लिख रेया है जी..... ओम परकास सारस्वत, सदर्शण बशिष्ट तुलसी रमण, बदरी सिंग भाटिया हुक्मिया सिंह ठाकर, बिक्रम मसाफिर परकास बादल कने होर भी बथेरे थे पौंचे होए... ए बी शुणा जे पूरे देस की अकादमियों की कताबों की दकाने थी लगी होई जी मेले में.... तो मैंने पूछ लिया जी किसी से.. की फिर तो म्हारी अकादमी कने बभाग की दकान भी होएगी लगी होई.. तो सारे ने मेरे को ए बताया कि म्हारी अकादमी बाले कने बभाग बाले का कोइ स्टाल नी थिया लगेया होया... फिर कारण पता किया आपके इस दादू ने.. तो ए बताया गेया कि अकादमी ने जब इतने सालों से कुछ किया ही नईं तो दूकान कैसे लगाएगी.... ए बात कुछ हजम नी होई जी.. मैंने बोला जे कादमी बाले तो कुछ न कुछ लगे होते हैं करणे जी... फिर किसी ने मेरे को बताया जे काम तो कादमी खूब कर रई है जी लेकण माननीय मुख्मंत्री जी को बरगलाणे कने उनकी चमचागिरी मारणे के अलाबा दुसरे काम से फुर्सत नीं जी.. लेकण मैं ऐसा नी मानता.. आज कल पीलिया भी शुणा है फैला होया.. कईं पैग सटती बारी कईं लाप्रबाई हो गयी होगी कने पीलिये ने जकड़ लिया होएगा कादमी के कार कारिंदों को.. कियोंकि पैग में तो उबला होया पाणी नी न डाल सकते हैं न जी !....
सच्ची बात होएगी ए जी..... की साले खाशटोरे फजूल में म्हारी कादमी कने बभाग के हारड बरकरों को खामखा में लगे होएँगे बदनाम करणे.... पता कराणा जरा आपने.. कने लग जाए पता तो मेरे को बी बताणा.... देखणा बे आपको लगे कसमी.....
खाष्टोरों के हाथ आते आते बच गया लाखारियों का जबरजस्त जलसा
सारेयां को चरनाबन्दे जी,
आपने शुणा होएगा की हमाचल प्रदेश के म्हारे पहाडां रा दिल सिमला में एक शोक गुप्ता नाम के आदमीं ने लाखारियों को हरानी में डाल दिया जी| बीकानेर से आकर एक आदमीं ने सिमले के गेटी थेटर में कबता कहाणी कने, कला की ऐसी छाप छोडी की म्हारे भासा बभाग कने भासा कादमी को तो पसीने पड गए जी | खचाखच भरेया होया गेटी थेटर कने देश के तन्ने मन्ने होए लखारी सिमले के गेटी थेटर में थिए कठरोए होए| लाखारियों के इस मेले में सुरजीत पातर, बिस्नू नागर जैसे तन्ने मनने होए कबी पूजे होए थिए जी| कहाणी में सूरज परकाश से लेकर माल चंत्र तवाडी कने गीता श्री भी गेटी में नज़र आई जी| होर बी कई मन्ने तन्ने होए लाखारियों ने इस जलसे में रौणक लाई जी| गाना बजाना कने पेंटिंग भी थी जबरजस्त| म्हारे भासा बभाग कने अकादमी को तो इस बात का आज तक पता नी चला के मनमोहन मितवा जैसा हाजर जवाब कने सुल्जा होया लखारी सिमले के पास बाले मसोबरे में कई सालों से है जी| मितवा साब मेरी उम्बर के होणे के बाबजूद बी एकदम चुस्त कने उनकी एक कताब अबी छप कर आणे आली है जी| सुरजीत पातर उनके खाशमख़ास मित्तर हैं जी| अब आप अंदाजा लगा सकते हैं की सुरजीत पातर ऐरे गेरे को अपणा मित्तर तो बणाने से रए| खैर... छोड़ो जी.. असली बात ए है कि इस जलसे को लेकर खाश्टोर खासे एक्टिव देखे गए जी| पता ए बी चला है कि खश्टोरों ने इस जलसे को अपने कब्जे में लेणा चाहा जी| भासा बभाग ने भी दाणा डालणा चाहा जी, कि आप म्हारा बैनर लगाओं कने गेटी फ्री में पाओ| लेकण शोक गुप्ता कोइ आलतू-फालतू खाश्टोर किसम का आदमी तो है नईं के दस बीस हज़ार के लालच में प्रोग्राम में भासा बभाग की खष्टोरी चलने देता| ख़ास बात ए है की शोक गुप्ता ने सरोता बी अपने थे लाए होए | लेकण इस प्रोग्राम के कामयाब होने के बाद कई लोक इससे बड्डे भारी फ्रस्ट्रेशण में है जी, कई कैते हैं कि जे इसमें हमाचल के लोक बलाने चाहिए थिए, कई एक बोलते हैं जे इसमें पैसे खाए गए, कई ए बोलते हैं जे इसमें दलाली बी होई है, जितने मूं तितनी बांतें जी | आप सारे लोग अपणे इस दादू की बात को मानते हैं जी, तो आपको जकीन डाला दूं न पैसे खाए गए, न दलाली होई है जी, बस थोड़ी गडबड ए होई की खाष्टोरों ने हमाचल के लाखारियों के नाम शोक गुप्ता को नीं दी इसी के चलते हमाचल के कुछेक लखारी कब्ता पढने से रै गए | लेकण इस के प्रांत बी कई हमाचल के सियाणे कने न्याणे लाखारियों को थिया बलाया होया| जो नीं बलाए गए बो ए बी नोट करें आपके इस बैल क्स्पीरिय्न्स कने हाईली कुआलिफैड रगडा दादू को बी नीं था बलाया होया | प्रंतु मैं जबर्जस्ती इसमें घुस गया कने शुणता रेया चुपचाप | विस्नु नागर कने सुरजीत पातर साब की कब्ताएं शुण कर पता चला की हमाचल के खाश्टोर कबियों की कब्ता तो इनके आगे पाणी भरती है जी| माल चन्द्र तिवाडी के बारे में शुणा तो मूंह बाक के रे गेया| माल चन्द्र तिवाडी कने म्हारे खाश्टोर लाखारियों में फर्क एक है की माल चंत्र लिखने में मस्त है, कने म्हारे खाष्टोरे अपने लिए घिसी पीटी होई अपनी कब्ता कहानी को लेकर सणमान के जगाड़ में लगे होए| पूरे भासा बभाग कने कादमी को अपनी गूंठी पर है नचाया होया | माल चन्द्र तबाडी कने खाष्टोरों के बीच का फरक आपके सामने ही है जी| कईयों ने फेसबुक पर कईयों ने पीठ के पीचे, तरे तरे के टूणे-टोटके करके इस जलसे को फेल करने कने बदानाम करने की कोसिस की, लेकन बो खुद ही फेल हो गए| किसी ने ए बी बताया कि कई खष्टोरे जो इस प्रोग्राम में ख़ास सलाहकार थिए बणे होए, तुलसी रमण को देखते ही ऐसे खो गए जैसे गदे से मूँड से शींग| शुणा ए बी है की कईयों ने तो सिर मूंड का जोर लगा दिया की तुलसी रमण को नी आणे देणा, लेकण फेल हो गए | बैसे तुलसी रमण बी है तो न बड्डा डाकरा मतबल करडा, लेकन जहां तिकर मैं जाणता हूँ इसको दिलका बिलकुल साफ़ है, जो बोलता है मूं पर बोल देता है सुसरा | और खाष्टोरे कई तो ऐसे हैं कि अपणे आप तो रेते हैं सारेयां के साथ मीठे मीठे, कने खष्टोरी करने के लिए दूसरो को करते हैं आगे, चाए फिर फेसबुक हो आ कि किसी अच्छे लखारी के हाथ पांव काटणे हो| लेकण यहाँ पर एक बाद आद रखणे आली है के ऊपर बाला तो फिर सबके साथ ही होता है न, बो खुद करता है जी दूद का दूद कने पाणी का पाणी| फिर कुल मालाकार सिमला का ए जलसा जबरजस्त थिया कने, खाष्टोरों के हाथ आणे से बाल बाल बच गेया |
रेणा बे सुले सूले
लाखारियों की जै जै, कने खाष्टोरों की लै लै....
लाखारियों की जै जै, कने खाष्टोरों की लै लै....
Subscribe to:
Comments (Atom)
