सिम्ले में पीले रंग का भूत

म्हाचल की राजधानी सिमले की हाखी आज कल पिउंली अनिकि पीली हो गयी है जी | इसका कारन आप लोक जो दूर बैठे हैं कने जो ग्रावों में बैठे हैं, कैसे समज सकते हैं जी | द्रसल जब साफ़ पाणी पलाणे आला मैक्मा ही टट्टी-पसाब मिला पाणी पला दे तो फिर आपको पीलिया नी होएगा तो भला क्या होएगा | आपको बता दूं कि सिम्ले में पाणी की किल्लत कोइ नोईं बात थोड़े ही है जी| ग्रेजों ने अपणे मजे रजे के लिए बसाया सिमला शैर इतना घणा हो गया है कि न तो अभ अब हरे हरे घास बाले वो धारठू नदर आते कने न ही देवदार के जंगल | 50 हज़ार लोकों के लिए बना ए शैर २०११ के आंकड़े के मताबिक 169,578/- की जनसंख्या में है जी , मतबल की दुगप्णे से बी जाता, न रैणे को जागा, न गाडी खरेडने को जागा | 2011 के बाद अब तो जी चार साल लगे होणे, तो लोकों ने होर नकाली होणि प्रोग्रेस कने ए आंकड़ा पौंच गया होगा जी कोइ ढाई लाख से बी जादा | म्हारी सरकार ने राजधानी बी आदी-आदी कर दी आदी सिम्ले में कने आदी धरमशाला में, परन्तु बस इ रैई ठगणे की ही राजधानी | काम तो जी सिम्ले में ही हो रए हैं जी | बस लीडरों का घूमणा फिरणा हो जाता है इसी बहाने बाकी तो सब आई वाश है जी | खैर स्लेबस की तरफ आता हूँ जी | सिम्ले की पीऊली हॉखी देख कर आप बी हरान परेशान रएंगे जी.. कि यहीं पर टट्टी- पसाब आला पाणी पीकर साफ पाणी के प्रोजेक्ट बण ते हैं जी |अब आप बोलेंगे जी सिम्ले में टट्टी पसाब आला पाणी...??? कुछ गल्ल हजम नी होई जी... तो जी बात ऐसी है कि म्हारा पाणी मैक्मा तो बचारा मजे की निंदर था सोया होया... इ तो भला होए इस पीलिये का जे सिम्ले की हाखी में चढ़ गया.. जब एक बार किसी ने सिम्ले को बोला जे भाई म्हारे पहाड़ा रे दिल सिमला.. तेरी तो हाखी प्यूंली-प्यूंली लग रई है मेरे को.. तो जब सीसे में देखा तब जाके पता चला के मेरे को तो परमैओं आनिकि पीलिया हो गया है जी.. फिर क्या था सिम्ले का छोटा भाई बाकास नगर, संजोली, ढली, टूटू, खालीनी, चक्कर होर तो होर.. वीआईपी सकट्रेट बी पिऊंले हो लिए.. इस पीलिये ने तो म्हारी बऊ बेटियों को बी नी छोडा.. देखो म्हारे मेयर साब की लाड़ी कने म्हारी प्यारी बऊ फाल्मा को बी होके रेया मुआ... एक तो म्हारे बड्डे आई इ एस अफसर साब बी होली पीले... आई ए एस अफसर तो माराज़ अपणे अगल बगल टाईट स्कोरटी बी रखते हैं.. लम्बी..लम्बी मूंछ आला बंदूकची रहता है साथ साथ.. ताकि साब जी को कोई ख़तरा न हो सके... लेकिन माराज़ पीलिया निकला सबका बाप आई ए एस अफसर को बी हो लिया.. होया इतणा कि सिम्ले के डाक्टर नी कर सके कट्रौल कने आई ए एस अफसर साब को पी जी आई जाणा पड़ गेया लाज कराणे | दरअसल शुणने में आया ए कि पीलिया ऐसे नी कर सकता था आई इ एस साब का कुछ.. एक दिन अपणे एक मित्तर के गलाणे पर दो पैग सट दिए कने बिगड़ी गल्ल.. दो पैग तक तो मिला सोडा कने बिसलरी का पाणी कने तीसरे पैग में तो फिर किसको पता कि अस्वनी खड्ड का टट्टी-पसाब आला पाणी ही ठोक दिया मला के.. तो फिर पीलिया थोड़ी प्छाणता है आई ए एस कने चपडासी.. बस अब आई ए एस साब का लाज है चलेया होया.. पीलिया तो ठीक हो रेया है पर बचारे के बेफजूल में 'नागे' जा रहे हैं पी जी आई में.. हा हा हा...डाक्टर जो दवाई के बीच में ही रैते हैं मुए.. उनको बी कहाँ छूट मिली.... लोकों को तो डाक्टर साब बोलते रए कि झाड़-फूंक नी करआणि, परन्तु अपणी जान बचाणे के डर से मूं छपाकर झाड़ फूंक कराणे जा रए हैं रोज.... लेकिन पीलिया उतरणे का नाम कैसे लेगा जी... टट्टी पसाब आला पाणी अपणा रंग तो दखा के ही जाएगा.. कई बचारे बेकसूर मारे बी गए... 
अब आप हँसेगे तो बेसक हंसो आपको कहाणी शणाता हूँ.. कि ए टट्टी पासब आया कहाँ से.. न न आप बोलो खुद ही जब एक साथ एक लाख सत्तर हज़ार लोक रोज छोटे जैसे सिम्ले में टट्टी-पसाब करेंगे... तो हमारे पाणी बभाग के दो कर्मचारी सीवरेज प्लांट में उस टट्टी पसाब का हसाब कताब कैसे रखेंगे.. उनोने सोचा जे ए टट्टी पसाब तो खाद का काम करता है..... तो दे तेरे की सीद्दा उसी खड्ड में दो जाणे जिससे म्हारे देसा रा दिल सिमला को पाणी जाता है.. बाकी काक्जों में तो ए बचारे पाणी बभाग के कर्मचारी पूरी कारवाई लगे होए थे करणे.. कि ओ रोज चैक करते हों जैसे.. उनका जाणे अगला महीना कि सीवरेज का पाणी किद्दर जा रेया है.. ए तो मुआ पीलिया आया नेईं तो ए तो पुलिस के घड़सोले में बी कहाँ आणे थिए... खैर अब फिलहाल पीलिया रोकणे के लिए अश्वनी खड्ड में मिलने बाला सीवरेज का पाणी जहाँ रोक दिया गया है वहीं.. लोकों का टट्टी पसाब तो जारी है.. लेकन बड्डे बड़ी पाणी बभाग के अफसरों का टट्टी-पसाब बंद हो गया है जी.. पुलस बाले अब कबी बी उनके चूतड़ कूट के न केवल उनकी लापरवाई के लिए उनको सजा देणे की फराक में हैं बल्कि उनकी नौकरी बी खतरे में पड़ गयी है..... पीलिया सिम्ले से सोलन की तरफ हो लिया है.. पता नहीं कब तक अपणा तांडव दखाएगा.. परन्तु आपसे एक अरदास है.. टट्टी पासाब खुले में न जाएं.. पाणी को खूब उबाल के पीएं.. अक्वागारड लगा सकें तो लगा लें.. ओ बी यू वी वाला.. नईं तो पीलिया महाराज तो आपके प्राण हरणे को खड़ा है....... कने किसी को बड़ा स्यापा पड़ा है..
जे देवा..

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