खाष्टोरों के हाथ आते आते बच गया लाखारियों का जबरजस्त जलसा

सारेयां को चरनाबन्दे जी,
आपने शुणा होएगा की हमाचल प्रदेश के म्हारे पहाडां रा दिल सिमला में एक शोक गुप्ता नाम के आदमीं ने लाखारियों को हरानी में डाल दिया जी| बीकानेर से आकर एक आदमीं ने सिमले के गेटी थेटर में कबता कहाणी कने, कला की ऐसी छाप छोडी की म्हारे भासा बभाग कने भासा कादमी को तो पसीने पड गए जी | खचाखच भरेया होया गेटी थेटर कने देश के तन्ने मन्ने होए लखारी सिमले के गेटी थेटर में थिए कठरोए होए| लाखारियों के इस मेले में सुरजीत पातर, बिस्नू नागर जैसे तन्ने मनने होए कबी पूजे होए थिए जी| कहाणी में सूरज परकाश से लेकर माल चंत्र तवाडी कने गीता श्री भी गेटी में नज़र आई जी| होर बी कई मन्ने तन्ने होए लाखारियों ने इस जलसे में रौणक लाई जी| गाना बजाना कने पेंटिंग भी थी जबरजस्त| म्हारे भासा बभाग कने अकादमी को तो इस बात का आज तक पता नी चला के मनमोहन मितवा जैसा हाजर जवाब कने सुल्जा होया लखारी सिमले के पास बाले मसोबरे में कई सालों से है जी| मितवा साब मेरी उम्बर के होणे के बाबजूद बी एकदम चुस्त कने उनकी एक कताब अबी छप कर आणे आली है जी| सुरजीत पातर उनके खाशमख़ास मित्तर हैं जी| अब आप अंदाजा लगा सकते हैं की सुरजीत पातर ऐरे गेरे को अपणा मित्तर तो बणाने से रए| खैर... छोड़ो जी.. असली बात ए है कि इस जलसे को लेकर खाश्टोर खासे एक्टिव देखे गए जी| पता ए बी चला है कि खश्टोरों ने इस जलसे को अपने कब्जे में लेणा चाहा जी| भासा बभाग ने भी दाणा डालणा चाहा जी, कि आप म्हारा बैनर लगाओं कने गेटी फ्री में पाओ| लेकण शोक गुप्ता कोइ आलतू-फालतू खाश्टोर किसम का आदमी तो है नईं के दस बीस हज़ार के लालच में प्रोग्राम में भासा बभाग की खष्टोरी चलने देता| ख़ास बात ए है की शोक गुप्ता ने सरोता बी अपने थे लाए होए | लेकण इस प्रोग्राम के कामयाब होने के बाद कई लोक इससे बड्डे भारी फ्रस्ट्रेशण में है जी, कई कैते हैं कि जे इसमें हमाचल के लोक बलाने चाहिए थिए, कई एक बोलते हैं जे इसमें पैसे खाए गए, कई ए बोलते हैं जे इसमें दलाली बी होई है, जितने मूं तितनी बांतें जी | आप सारे लोग अपणे इस दादू की बात को मानते हैं जी, तो आपको जकीन डाला दूं न पैसे खाए गए, न दलाली होई है जी, बस थोड़ी गडबड ए होई की खाष्टोरों ने हमाचल के लाखारियों के नाम शोक गुप्ता को नीं दी इसी के चलते हमाचल के कुछेक लखारी कब्ता पढने से रै गए | लेकण इस के प्रांत बी कई हमाचल के सियाणे कने न्याणे लाखारियों को थिया बलाया होया| जो नीं बलाए गए बो ए बी नोट करें आपके इस बैल क्स्पीरिय्न्स कने हाईली कुआलिफैड रगडा दादू को बी नीं था बलाया होया | प्रंतु मैं जबर्जस्ती इसमें घुस गया कने शुणता रेया चुपचाप | विस्नु नागर कने सुरजीत पातर साब की कब्ताएं शुण कर पता चला की हमाचल के खाश्टोर कबियों की कब्ता तो इनके आगे पाणी भरती है जी| माल चन्द्र तिवाडी के बारे में शुणा तो मूंह बाक के रे गेया| माल चन्द्र तिवाडी कने म्हारे खाश्टोर लाखारियों में फर्क एक है की माल चंत्र लिखने में मस्त है, कने म्हारे खाष्टोरे अपने लिए घिसी पीटी होई अपनी कब्ता कहानी को लेकर सणमान के जगाड़ में लगे होए| पूरे भासा बभाग कने कादमी को अपनी गूंठी पर है नचाया होया | माल चन्द्र तबाडी कने खाष्टोरों के बीच का फरक आपके सामने ही है जी| कईयों ने फेसबुक पर कईयों ने पीठ के पीचे, तरे तरे के टूणे-टोटके करके इस जलसे को फेल करने कने बदानाम करने की कोसिस की, लेकन बो खुद ही फेल हो गए| किसी ने ए बी बताया कि कई खष्टोरे जो इस प्रोग्राम में ख़ास सलाहकार थिए बणे होए, तुलसी रमण को देखते ही ऐसे खो गए जैसे गदे से मूँड से शींग| शुणा ए बी है की कईयों ने तो सिर मूंड का जोर लगा दिया की तुलसी रमण को नी आणे देणा, लेकण फेल हो गए | बैसे तुलसी रमण बी है तो न बड्डा डाकरा मतबल करडा, लेकन जहां तिकर मैं जाणता हूँ इसको दिलका बिलकुल साफ़ है, जो बोलता है मूं पर बोल देता है सुसरा | और खाष्टोरे कई तो ऐसे हैं कि अपणे आप तो रेते हैं सारेयां के साथ मीठे मीठे, कने खष्टोरी करने के लिए दूसरो को करते हैं आगे, चाए फिर फेसबुक हो आ कि किसी अच्छे लखारी के हाथ पांव काटणे हो| लेकण यहाँ पर एक बाद आद रखणे आली है के ऊपर बाला तो फिर सबके साथ ही होता है न, बो खुद करता है जी दूद का दूद कने पाणी का पाणी| फिर कुल मालाकार सिमला का ए जलसा जबरजस्त थिया कने, खाष्टोरों के हाथ आणे से बाल बाल बच गेया |
रेणा बे सुले सूले
लाखारियों की जै जै, कने खाष्टोरों की लै लै....

फेसबुक का जमाना है जी...

देखो जी... आपका ए दादू एक दम फिट एंड फ़ाईन है जी | कबी-कबी गल-बात करणे का जिऊ नीं बी करता जी... तो इसका मातबल ए है कि थोड़ा खस्टोरों को बी खुस होणे देते हैं जी... देखो जी दो कौड़ी के लोक अपणे गले शड़े होए लेखण को बी ऐसे ढ़ोल-ढमाके के साथ दखालते हैं कि इस्से जादा बदिया' तो किसी ने नीं लिखा होया... कमाल की बात ए है कि कुछ खश्टोरों की बजे से हमाचल में लखारियों के हक पर जो कुल्हाड़ी चल रई है बो किसी से छिपी थोड़े ही है.... 
आपके इस दादू को पिछले दिनो लिखणे से रोकणे के लिए बडड़ा भारी ज़ोर लगाया गिया... कई खबारों के संपादकों को फून किए गए कि आपका ए दादू बकबास कने एक नंबर का कूड़ा कने कबाड़ लिखता है जी.... अब आपके इस दादू के शटैल में लिखणे के जागाड़ बी कर रे भतेरा... लेकण जो गिद्दड़सिंगी मेरे को ठगड़ा राम बकलम खुद दादू ने दितती होई है बो किसी ऐरे गैरे नाथू खेरे के पास थोड़े हो सकती है जी... लेकण फसोस तो तब जाकरके होता है जी जब कोई आपणा बाणणे का नाटक बी करे कने पीठी पर क्ल्हाड़ी बी मौके पर मारता रए.... कई खबार बाले भीतर भीतर तो है खश्टोरों से मिले होए लेकण ड्रामा ऐसा करते हैं कि खश्टोर तो उनके जानी-दुशमण है जी... ऐसे में हमाचल में लिखणे बाले लखारी बचारे परेशान है कि उनका लिखा होया कौण छापेगा.... खबार बी तो आजकल झूठा परचार मांगती है जी... खस्टोरों के पास एक कलाकारी तो पैल्ले ही है जी.... हमारे खश्टोरों की कला इटणी श्ट्रोंग है कि आपको पहाड़ के ऊपर ऐसा सुर्खी क्रीम पाऊडर लगाके पेश करेंगे कि आपको पता बी नीं चलेगा के ए तो ओही पहाड़ है जो कई साल पैलले नांगे कर दिए गए थे.... कने खश्टोर इसके नाम पर इमोषणल ब्लैकमेलिंग करके एक जैसी कहाणी, कबता लिख रए हैं कने एक झुण्ड बणा कर पहाड़ों की इज्जत लूटणे में लगे होए हैं जी.... इसके बाद बी शुणा है जे हमाचाल के बार के लखारी इन दिनो शिमला के मौसम में लखारियों बाला रंग घोल रए हैं जी कने 13 कने 14 फरबरी को गेटी थेटर में जबरजस्त लखारी सम्मेलण हो रेया है जी... मजे की बात ए है कि हमाचल के लखारी इसमें नाम मात्तर के है... इसका सीददा-सीददा कारण ए है कि हमाचल के लखारियों की ओछी राजनीति में कोई बी लखारी नीं चाहता पड़ना| देखो खश्टोर बिदया कब तक खबारों के तथा कथित 'बुद्धिजीवी' संपादकों को कब तिकर बेबकूफ बणा सकती है| चरणाबंदे जी... लेकण आपका बौत धनयाबाद कियोंकि मेरे को तो खबार से तिगणे इदर फेसबुक पर ही पड रहे हैं जी... फेसबुक का जमाना है जी...