कताबों का बड्डा भारी मेला

जै देवा जी... 
माफ़ करणा जी पिछले कई दिनों से तरे तरे की बामारियों से था घिरेया होया | फिर आजकल पीलिया बी हो लिया जी | इस पता नी आपके इस दादू के मरणा कब होएगा | खैर... पिचले दिनो मेरी एक प्यारी दोस्त सरोज बशिष्ठ का दाणा पाणी बी मुक गेया कने बचारी म्हारे को छोड़ के चली गयी... तिसते परान्त म्हारे सारे ते प्यारे कने बजुर्ग संत्येन शर्मा जी ने भी म्हारा साथ छोड़ दिया | भगबाण इन लाखारियों को सुरग में सुख शांती दे जी.. 
आज कल मैं देख रेया था कि दिल्ली में कताबों का बड्डा भारी मेला थिया जी लगेया होया... मेरे को किसी ने इ बी शणाया जे कई म्हारे लखारी बी इस जातर में पौंचे होए थे..... लेकण मेरा सारे ते प्यारा राज कमार रकेश तो मेले से आणे को बी नीं था तयार.... हो बी क्यों जी... असल में खून पसीने कने मीणत से लिख रेया है जी..... ओम परकास सारस्वत, सदर्शण बशिष्ट तुलसी रमण, बदरी सिंग भाटिया हुक्मिया सिंह ठाकर, बिक्रम मसाफिर परकास बादल कने होर भी बथेरे थे पौंचे होए... ए बी शुणा जे पूरे देस की अकादमियों की कताबों की दकाने थी लगी होई जी मेले में.... तो मैंने पूछ लिया जी किसी से.. की फिर तो म्हारी अकादमी कने बभाग की दकान भी होएगी लगी होई.. तो सारे ने मेरे को ए बताया कि म्हारी अकादमी बाले कने बभाग बाले का कोइ स्टाल नी थिया लगेया होया... फिर कारण पता किया आपके इस दादू ने.. तो ए बताया गेया कि अकादमी ने जब इतने सालों से कुछ किया ही नईं तो दूकान कैसे लगाएगी.... ए बात कुछ हजम नी होई जी.. मैंने बोला जे कादमी बाले तो कुछ न कुछ लगे होते हैं करणे जी... फिर किसी ने मेरे को बताया जे काम तो कादमी खूब कर रई है जी लेकण माननीय मुख्मंत्री जी को बरगलाणे कने उनकी चमचागिरी मारणे के अलाबा दुसरे काम से फुर्सत नीं जी.. लेकण मैं ऐसा नी मानता.. आज कल पीलिया भी शुणा है फैला होया.. कईं पैग सटती बारी कईं लाप्रबाई हो गयी होगी कने पीलिये ने जकड़ लिया होएगा कादमी के कार कारिंदों को.. कियोंकि पैग में तो उबला होया पाणी नी न डाल सकते हैं न जी !....
सच्ची बात होएगी ए जी..... की साले खाशटोरे फजूल में म्हारी कादमी कने बभाग के हारड बरकरों को खामखा में लगे होएँगे बदनाम करणे.... पता कराणा जरा आपने.. कने लग जाए पता तो मेरे को बी बताणा.... देखणा बे आपको लगे कसमी.....