चरणाबन्दे जी... बड्डे सालों बाद किसी मरद के बच्चे ने दूर पहाड़ों में
बैठे आपके इस दादू के बारे में सूंचा.... मेरे पुत्तर... नूं... धोत्रू
.. पोत्रू , घरैत-सरीक.. सारे लोक मुझे बीडी का सुट्टा नीं लगाणे नीं
देते थिए... इस अरुण जेटली, नाम के अक्लमंद आदमी ने मेरे मन की बात कैसे
पकड ली मैं तो हरान रे गेया... ऐसा अन्तर्यामी कई मुरादों मिन्नतों के बाद
मिलता है जी... कई सालों बाद आपके इस सयाणे दादू को बजट देखणे की चड़ी कने
सारे ते जाददा फैदा बी होया मेरे को ई | पूछो कैसे... वो ऐसे कि भई कि
बीड़ी जैसी आम जरूरत की चीज़ के दाम एक अठन्नी भी नी बधाए... इससे ए
साबत हो गया कि बीडी जैसी चीज आम आदमी के लिए कितणे माइने रखती है जी..
इसका मतबल ए होया कि बीडी ही एकमात्र ऐसा साधन है जिसके शोटणे आनिकि
ग्रेजी में बोले तो पीणे से फेफड़े को ताकत मिलती है जी | बो सारे लोग
मूर्ख किसम के लोक हैं जो बीड़ी को सेहत के लिए हानिकारक होणे का
झूठा-मूठा परचार करते हैं जी... ऐसा होता तो म्हारे बजट मनिस्टर साब इतणी
सारी चीजों के दाम बधा सकते हैं तो बीड़ी के दाम बी जरूर बधाते...? इतणे बी
पागल थोड़े न हैं...? बाचारी बीड़ी को सस्ते में क्यों छोड़ते.. कने म्हारा
बजट मनिस्टर कोई ऐरा गिरा नत्थू खैरा आदमी भी नी हो सकता..... उसकी बात तो
पाथर की लकीर की तरे मानूंगा जी.. मैंने तो अपणे बच्चों को बोल दिया....
है ... जे अब मेरे को बीडी पीणे से रोका तो सीददी शकैत बजट मनिस्टर साब के
पास ठोकूंगा लगाके.. गऊ कसम... म्हारे बजट मनिस्टर साब का गुड मैन दी
लालटेन दामाग देखो आप... कि बीडी जैसे लुप्त हो रई......हमारी धरोहर बीडी
के शुट्टे को शहीद होणे से बचा लिया... बीड़ी के खलाफ पिचली सरकार की
साजिशों को बी बजट मनिश्टर साब ने मूं की दखा दी... अब मैं और मेरे जैसे
गाँव के जागरूक बीड़ीमार बड्डी छाती करके कह सकते हैं कि अच्छे दिन आणे बाले
नी है बला... आ गए हैं.. हर तरफ बीडी जलाई ले जिगर से पीया.. गाणा चलेगा
अब तो.. आपके इस दादू को किसके बाप की मजाल, जे बीडी पीणे से रोक ले.. अब
तो लाम्बी-लंबी.... ब्लेंडर पराइड सग्रिट पीणे आले बीअपणे स्टेटस का ख्याल
करते होए घुसलखाने आनिकि बाथरूम में बीडी का शूट्टा चोरी छुपे से लगाएंगे
जी..क्योंकि सारे के सामणे तो उनके स्टेटस की बेइज्जती खराब होएगी जी | कने
इतणी मैंगी सग्रीट पीएगा बी कौण ? किसानो की आमदनी पांच सालों में दुगणी
होणे की बात तो बजट मनिश्टर साब ने बड्डी चालाकी से बोली है जी.... मेरे को
ए ख्याल फिर रेया है जे .. बजट मनिश्टर साब को ए पता लग गेया है कि अगली
पांच साल से पैल्ल्ले तो लैक्षण बी आ जाणा | सरकार तो आणे से रई दबारा..
फिर अइसे में किसानों की कमाई दुगणी करणे का शोशा छोड़ने में क्या फरक पड़ता
है... अगली सरकार से जब कसान दुगणी फसल की बात बताएंगे तो बजट मनिश्टर को
किसने पूछणा... अगर पूछ बी लिया तो कै देंगे कि भाई फसल दुगणी तो तब होणी
थी जब सरकार बी म्हारी होती.. अब सरकार म्हारी नहीं तो हम फसल बी दुगणी
कहाँ से करे.. फिर बी मरणे माराणे की नौबत आ गयी तो किसानों का एक लाख
रपइये का.. कि पता नीं दो लाख रपए का बीमा तो है ई किया होया.. भले ही
नकसाण 5 लाख का हो, जब किसान जैर खा ले तो दो लाख तो मिल ही जाणे | कपडे की
जगह पुराणी घास पत्ती के पोशाक फिर से मशहूर होएँगे.. तो आपका क्या
घिसेगा जी.... उलटे दो पइसे बचेंगे होर... मलाज्मों को 3 हजार टैक्स में
छूट देणे से मतबल होणा चाहिए... पीचे से जो 10 हजार की पतानी कितणे हजार के
टैक्स उनके चूतडों में ठोके हैं.. उससे उनका क्या लेणा-देणा. अपणे काम से
काम रखणा चाइये... हैं न जी... कपडे का क्या है पराणे कपडे को टल्ली लगा कर
फैसन करो... खरीदणे की तो औकात नीं रएगी अब आपकी.. बजट मनिश्टर साब ने
कुर्तु सुथणु इतणे मइंगे कर देणे कि आपको नए खरीदणे की सूंच भी न आए | इससे
आपका कितणा पोइंसा बच जाएगा जी..... इसते बदिया बजट बी कदी मिल सकता थिया
आपको.... जादा नीं मछरैणा मतबल चिढाणा बजट मंत्री साब को कइं गुस्सा आ गया
तो.. मंत्रियों संतरियों की तन्खा कर देंगे दुगणी.. फिर आपको क्या
मिलेगा... ठोसा......................... गलाया बोल्या माफ़....