फेसबुक का जमाना है जी...

देखो जी... आपका ए दादू एक दम फिट एंड फ़ाईन है जी | कबी-कबी गल-बात करणे का जिऊ नीं बी करता जी... तो इसका मातबल ए है कि थोड़ा खस्टोरों को बी खुस होणे देते हैं जी... देखो जी दो कौड़ी के लोक अपणे गले शड़े होए लेखण को बी ऐसे ढ़ोल-ढमाके के साथ दखालते हैं कि इस्से जादा बदिया' तो किसी ने नीं लिखा होया... कमाल की बात ए है कि कुछ खश्टोरों की बजे से हमाचल में लखारियों के हक पर जो कुल्हाड़ी चल रई है बो किसी से छिपी थोड़े ही है.... 
आपके इस दादू को पिछले दिनो लिखणे से रोकणे के लिए बडड़ा भारी ज़ोर लगाया गिया... कई खबारों के संपादकों को फून किए गए कि आपका ए दादू बकबास कने एक नंबर का कूड़ा कने कबाड़ लिखता है जी.... अब आपके इस दादू के शटैल में लिखणे के जागाड़ बी कर रे भतेरा... लेकण जो गिद्दड़सिंगी मेरे को ठगड़ा राम बकलम खुद दादू ने दितती होई है बो किसी ऐरे गैरे नाथू खेरे के पास थोड़े हो सकती है जी... लेकण फसोस तो तब जाकरके होता है जी जब कोई आपणा बाणणे का नाटक बी करे कने पीठी पर क्ल्हाड़ी बी मौके पर मारता रए.... कई खबार बाले भीतर भीतर तो है खश्टोरों से मिले होए लेकण ड्रामा ऐसा करते हैं कि खश्टोर तो उनके जानी-दुशमण है जी... ऐसे में हमाचल में लिखणे बाले लखारी बचारे परेशान है कि उनका लिखा होया कौण छापेगा.... खबार बी तो आजकल झूठा परचार मांगती है जी... खस्टोरों के पास एक कलाकारी तो पैल्ले ही है जी.... हमारे खश्टोरों की कला इटणी श्ट्रोंग है कि आपको पहाड़ के ऊपर ऐसा सुर्खी क्रीम पाऊडर लगाके पेश करेंगे कि आपको पता बी नीं चलेगा के ए तो ओही पहाड़ है जो कई साल पैलले नांगे कर दिए गए थे.... कने खश्टोर इसके नाम पर इमोषणल ब्लैकमेलिंग करके एक जैसी कहाणी, कबता लिख रए हैं कने एक झुण्ड बणा कर पहाड़ों की इज्जत लूटणे में लगे होए हैं जी.... इसके बाद बी शुणा है जे हमाचाल के बार के लखारी इन दिनो शिमला के मौसम में लखारियों बाला रंग घोल रए हैं जी कने 13 कने 14 फरबरी को गेटी थेटर में जबरजस्त लखारी सम्मेलण हो रेया है जी... मजे की बात ए है कि हमाचल के लखारी इसमें नाम मात्तर के है... इसका सीददा-सीददा कारण ए है कि हमाचल के लखारियों की ओछी राजनीति में कोई बी लखारी नीं चाहता पड़ना| देखो खश्टोर बिदया कब तक खबारों के तथा कथित 'बुद्धिजीवी' संपादकों को कब तिकर बेबकूफ बणा सकती है| चरणाबंदे जी... लेकण आपका बौत धनयाबाद कियोंकि मेरे को तो खबार से तिगणे इदर फेसबुक पर ही पड रहे हैं जी... फेसबुक का जमाना है जी...

थिंक पौजिटिव जी....

देखा... आपने एक और सणामन समारोह का सरकारी फतवा जारी होया है जी... अब मैंने 'थिंक पोजिटिव' का फार्मूला मानणा शुरू कार दिया है जी, नईं तो गऊ कसम आपको इससे अगले सणमान किसको दिए जाणे हैं, मेरे को बो फिक्सिंग बी पता है जी.... लेकण थिंक पॉज़िटिव... ऊपर बाला तो सब देख रेया है न जी, अगर सणमाण गलत तरीके से दिए होएंगे तो फिक्स करणे बाले उसकी नदर से कैसे बच सकते हैं जी, उनका भला करेंगे राम... थिंक पौजिटिव जी....

बैठे का बैठ जा.... आराम से...

देखा जी... इदर भी खाश्टोरों ने अपणी घटिया औकात दखा दी, छैल बांके हमाचल को अपणे मतबल के लिए और अपणी घटिया दो कौड़ी की राजनीति के लिए हमाचल के नाम पर कालख पोथ दी जी.... ऐसे घटिया गिरे होए लोगों का तो भगबान ही 'भला' करे जी ! कने ऐसे लोकों को भगबान ही नांगा करेगा जी | हमाचल के लोक पूरे देश में सारे ते बांके कने सारे ते सांत है जी... फिर हमाचल के माथे पर कौन मनहूस काला टीका लगा सकता है जी| आप सारे नन्द लो कने हमाचल का महौल खराब कर रहे खष्टोरों से साबधान रहो जी.. अबी इस बक्त बिश्राम.. बैठे का बैठ जा.... आराम से...
चरनाबंदे....

गलाया बोलेया माफ जी ....

चरनाबंदे जी सारेयां बाड्डेयां कने छोटेयां को ...
पिछले दो तीन दिनों से एक खबर शुण रेया हूँ जी के.... धरमशाला में किसी छोटी बच्ची के साथ कुछ राग्शसों ने गंदा काम किया है जी...कने इसमें लीडरों के नाती-पोतों का हाथ होणे की बात बी फैली होई है जी... खबर एक बी है फैली होई की बच्ची के साथ दिल्ली की दामिनी से बी खतरनाक बारदात होई है जी... कने बच्ची को हमाचल से बाहर लाज के लिए भेजा गेया है जी.... लीडरों की दखलंदाजी के कारण खबार बाले बी उनकी माँद में घुस गए हैं जी कने खबर तक नीं छाप रए...

........................ इदर एक बात क्लीयर करणा चाहता हूँ जी.... कि इसमें दो बाते हो सकती है जी... एक तो मेरे को ए बशवाश है कि एक परसेंट तो म्हारा मीडिया बिका होया नीं होगा ना जी... एक आदा खबार तो इस खबर को छापता जी... अगर खबर सच्ची होती जी....... हमाचल में इतणा भी गुन्डा राज नी हैं जी... हमाचल बौत सारे लीटर खश्टोरे हैं, लेकण इतणे बी नीं कि ऐसी दहशतगर्दी फला दे... सून्चणे बाली बात ए है कि म्हारी पुल्स कने डीसी साब इस मामले पर अपणे मूँ पर हाथ रख के कियों है बैठे होए... इस बात पर उनको आगे आणा चाहिए थिया... ताकि दूद का दूद कने पाणी का पाणी हो जाए....... डीसी साब कने पुल्स की चूँ तक न करणे से दाल में काले का शक तो होएगा जी...
कुछ साल पराणी बात शाणाता हूँ आपको... एक बार म्हारे पहाड़ा रा दिल सिमला में अफवा ए फैली की कुछ प्राईबेट अस्पतालों में लोकों को पकड़ कर लाया जा रेया है कने... उनकी किडनी कने कालजा नकाला जा रेया है..... पूरे हमाचल में दहशत फैल गई जी... फिर होणा केया था जी... म्हारा तो डर के मारे शांगा (गला) शूख गेया जी... कसम जी रगुनाथ जी की... मैंने तो ढालपुर से आगे जाणे की नीं सोची.... लेकण पूरे परदेश में जो डर का माहौल बणा उसका अणदाजा आप क्या लगा सकते होएंगे... तिसते परांत की बात शणाऊँ मैं आपको काबल पुल्स अफसर की.... पूरा नाम तो मैं इनका बिसर गिया सयाणे होणे के कारण लेकण ए साब उस टैम म्हारे पहाड़ा रा दिल सिमला के एसपी थिए | इनका नाम थिया मरढ़ी साहब.... आज बी शायद मेरी आददाश्त के हसाब से ए और बड्डे अफसर होणे चाइए हमाचल पुल्स में... तो मरढ़ी साहब ने जब देखा कि लोकों में दहशत फ़ैल गई है.... तो इनोने अपणी काबलियत का नमूना पेश किया... मरढ़ी साहब शुणा है 'शाली" शब्द का इस्तेमाल बौत करते थिए... मरढ़ी साब ने एक फरमान जारी कर दिया... कि " शाली जो बी किडनी नकालने बालों की बात करेगा.... शाली उषको पकड़ों कने उससे पूछो कि उसको किसने बताया किडनी नकालणे बालों के बारे में... कने शाली उस आखरी आदमी तक पौंचों जिसने ए खबर शुरू की है.... फिर आ तो किडणी चोरने बाला पकड़ा जाएगा आ फिर अफबा फलाणे बाले के चुतड़ कुटे जाएंगे..... लो जी फिर केया थिया... जब इस बात का अलाण मरढ़ी साब ने किया... तो डर के मारे लोक तो ए बी बिसर गए कि उनकी अपणी बी किडणी है... कने नाचोड़ ए निकला कि सारी अफवा थी... मरढ़ी साहब को मेरे तरफ से फ़ानी ठोक के सलूट जी.....
इसको कैहते हैं काबल पुल्स.... अगर ए खबर बी सच्ची है आ फिर अफवा है तो इसके लिए मरढ़ी साहब जैसे काबल अफसर ही चाइए जी.... जिनका आज टोटा है... भगबान करे ए खबर बी अफबा निकले कने फलाणे बालों के छुतड़ कूटे जाएँ.... गलाया बोलेया माफ जी ....

एक मेरे मित्तर थिए जी

एक मेरे मित्तर थिए जी... बड्डे भाई की तरे माणता थिए जी उनको... द्रसल मेरी गाँव में बंजर जमीन थी जी.... मित्तर जी उठते बैठते म्हारे साथ थिए... खाते पीते भी कट्ठा... एक दिन म्हारे में समझोता होया जी... कि इस बंजर जीमी (जमीन ) पर कुछ उगाया जाए... वो भी मदद करेंगे..... लेकण पाणी-खाद, सलाह मशविरा वो मेरे से लेते थिए... कने मैं उनसे लेता थिया... कने जमीन पर फल-फ्रूट लगणा शुरू होया.... फिर क्या था तिसते परांत जिमी जीयां-जीयां लगी सूना उगलणे... मेरी जमीन पर लगे फल-फ्रूट खा गए मित्तर जी.... कने मेरी जमीन पर आपणा प्लॉट बणा लिया मित्तर जी ने...... कायदे कानून कुछ होएंगे जी कि नीं.....? मित्तर जी ने जो किया अच्छा था कि नकाम्मा... आप बी बोलो... कोरट कचहरी जाणे से फैदा होएगा कोई....??